श्री. नारायणन अप्पू
विशिष्ट वैज्ञानिक श्री नारायणन अप्पू ने 01/07/2026 को इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC),महेंद्रगिरी का कार्यभार संभाला।
आईपीआरसी के निदेशक बनने से पूर्व, उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें आईपीआरसी के सहायक निदेशक, क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली परीक्षण इकाई के उपनिदेशक, आईपीआरसी के प्रशासनिक सेवा प्रमुख, आईपीआरसी के सतर्कता अधिकारी, क्रायोजेनिक एवं सेमी-क्रायोजेनिक उपप्रणाली परीक्षण सुविधा के महाप्रबंधक तथा डिज़ाइन एवं विश्लेषण समूह प्रमुख एवं सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवा प्रमुख जैसे पद शामिल हैं। वर्तमान में भी वे एकीकृत क्रायोजेनिक इंजन एवं चरण परीक्षण सुविधा (Integrated Cryogenic Engine & Stage Test Facility) के परियोजना निदेशक का दायित्व निभा रहे हैं।
उन्होंने अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई के गिंडी इंजीनियरिंग महाविद्यालय से यांत्रिक अभियांत्रिकी (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1989 में उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी), महेंद्रगिरि (वर्तमान में इसरो प्रणोदन परिसर – आईपीआरसी) में अपना कार्यभार ग्रहण किया।
उन्होंने क्रायोजेनिक प्रक्रिया अभियांत्रिकी (Cryogenic Process Engineering), विशेष रूप से रॉकेट प्रणोदन प्रणालियों के परीक्षण एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त की है। उन्होंने इसरो के प्रक्षेपण यान कार्यक्रम के लिए क्रायोजेनिक तथा सेमी-क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणालियों के परीक्षण हेतु आवश्यक महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक सुविधाओं के अभिकल्पन, अभियांत्रिकी, स्थापना, संचालन एवं अनुरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें हाइड्रोजन एवं हीलियम द्रवीकरण संयंत्र, क्रायोजेनिक मुख्य इंजन एवं चरण परीक्षण सुविधा, थ्रस्ट चेंबर परीक्षण सुविधा, क्रायोजेनिक उपप्रणाली परीक्षण सुविधा तथा सेमी-क्रायोजेनिक कोल्ड फ्लो परीक्षण सुविधा आदि प्रमुख हैं। उन्होंने उड़ान प्रेक्षणों के आधार पर प्रणोदन प्रणालियों में उत्पन्न विसंगतियों के अनुकरण (Anomaly Simulation) से संबंधित अनेक परीक्षणों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनमें इंजन के प्रारंभिक संक्रमणकालीन संचालन अनुक्रम (Engine Startup Transient Operating Sequence), बूस्टर टर्बोपंप कैविटेशन का अभिलक्षणन (Booster Turbopump Cavitation Characterization) आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने समुद्र-तल (Sea Level) वातावरण में अतिविस्तारित नोज़ल (Overexpanded Nozzle) वाले इंजन के परीक्षण को संभव बनाने हेतु नोज़ल संरक्षण प्रणाली (Nozzle Protection System) के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे क्रू मॉड्यूल प्रणोदन के लिए हरित हाइपरगोलिक द्वि-प्रणोदक (Green Hypergolic Bipropellant), चंद्र एवं मंगल अभियानों के लिए इन-सीटू प्रणोदक उत्पादन (In-situ Propellant Production), हीलियम पुनर्प्राप्ति प्रणाली (Helium Recovery System) आदि के विकास हेतु कार्यरत टीमों का नेतृत्व भी कर रहे हैं। वे इसरो की अनेक तकनीकी समितियों का नेतृत्व करते हैं तथा उनमें सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनकी प्रमुख रुचियों के क्षेत्र क्रायोजेनिक प्रक्रिया, प्रणोदन परीक्षण तथा हाइड्रोजन सुरक्षा हैं।
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